आधार कार्ड बनवाने गया था, पहुंच गया जेल और फिर मौत, पत्नी बोली- मेरे पति को फंसाकर ले ली जान बरेली सेंट्रल जेल टू में बंद फर्जी जमानत के मामले के आरोपी परवेश उर्फ प्रवेश की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन और पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठा

आधार कार्ड बनवाने गया था, पहुंच गया जेल और फिर मौत, पत्नी बोली- मेरे पति को फंसाकर ले ली जान
बरेली सेंट्रल जेल टू में बंद फर्जी जमानत के मामले के आरोपी परवेश उर्फ प्रवेश की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन और पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतक की पत्नी परवीन ने पति को साजिश के तहत फंसाने, उचित इलाज न मिलने और हत्या तक का आरोप लगाया है। वहीं जेल प्रशासन ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बंदी को बेहतर उपचार के लिए ही दिल्ली रेफर किया गया था।
परवेश की पत्नी परवीन के मुताबिक उनके पति फतेहगंज पश्चिमी के वार्ड नंबर आठ के रहने वाले थे और पढ़े-लिखे नहीं थे। वह अपनी बेटी का आधार कार्ड बनवाने के लिए बरेली आए थे। आरोप है कि इसी दौरान एक वकील ने उन्हें धोखे में रखकर एक दूसरे आरोपी का जमानतदार बना दिया। इस प्रक्रिया में उनका मूल आधार कार्ड, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपने पास रख लिए गए।
मुख्य आरोपी नहीं पहुंचा कोर्ट, जमानती को जाना पड़ा जेल परवीन का आरोप है कि जिस आरोपी की जमानत कराई गई थी, वह कई वारंट जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद जमानती होने के कारण उनके पति के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उनका कहना है कि बाद में उनके पति के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।
बीमारी के बावजूद नहीं मिला बेहतर इलाज: पत्नी मृतक की पत्नी का आरोप है कि परवेश पहले से बीमार चल रहे थे, लेकिन जेल में उन्हें समय पर समुचित इलाज नहीं मिला। लगातार तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर चिकित्सा मिल जाती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
जेल प्रशासन बोला- इलाज में नहीं बरती गई कोई लापरवाही उधर, जेल प्रशासन का कहना है कि परवेश की हालत बिगड़ने पर सभी आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। अधिकारियों का दावा है कि इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई और अस्पताल में उपचार के दौरान ही उनकी मृत्यु हुई।
आरोपों के बीच जांच की उठी मांग परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं जेल प्रशासन अपने स्तर पर सभी प्रक्रियाओं का पालन किए जाने का दावा कर रहा है। अब यदि मामले की जांच होती है तो मौत की परिस्थितियों और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।
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